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TOP 51 URDU & HINDI SHAYARI / POETRY

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Hello guys, hope you doing well, today i amgoing to share 51 Poetry that will really inspire you.


-  Top 51 Hindi & Urdu Poetry -


ज़िन्दगी तस्वीर भी है और तकदीर भी,
फर्क तो सिर्फ रंगो का है,
मनचाहे रंगों से बने तो तस्वीर, और
अनचाहे रंगो से बने तो तकदीर.

दर्द कैसा भी हो कभी आँख नम ना करो,
रात काली सही लेकिन ग़म ना करो,
एक सितारा बन जगमगाते रहो,
ज़िन्दगी में यूँ ही सदा मुस्कुराते रहो।

हमें न मोहब्बत मिला न प्यार मिला,
हम को जो भी मिला बेवफा यार मिला,
अपनी तो बन गई तमाशा ज़िन्दगी,
हर कोई अपना उद्देश्य का तलबगार मिला।

राह संघर्ष की जो चलता है,
वह ही संसार को चालू है।
जिसने रातों से जंग जीती है,
सूर्य बनकर वही निकलता है।

रूह मिट्टी से या मिट्टी रूह से तंज है,
दोनों के बीच शायद सुकून का जंग है।


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जो मिला कोई न कोई सबक दे गया, 
अपनी ज़िन्दगी में हर कोई गुरु निकला।

कश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया,
मेरी तलाश का भी तो जरिया बदल गया,
ना शक्ल बदली ना अक्ल बदली,
बस लोगों के देखने का नजरिया बदल गया।

ले दे के अपने पास फ़क़त एक नजर तो है,
क्यूँ देखें ज़िन्दगी को किसी की नजर से हम।

जो मजिन्लो को पाने की चाहत रखते हुए,
वो समंदरो पर भी पथरो के पुल बना देती है।

जो मुस्कुरा रहा है, उसके दर्द ने पाला होगा,
जो चल रहा है उसके पाँव में ज़रूर छाला होगा,
बिना आत्मविश्वास के चमक नहीं मिलती,
जो जल रहा है तिल-तिल, वही दीए में उजाला होगा।

ये जात तमाशा बन चुकी है,
दुनिया के मेले से थक चुकी है।

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लहरों का शांत देखकर ये मत समझिए, 
की समंदर में रवानी नहीं है,
जब भी उठेंगे तूफ़ान बनकर उठेंगे,
अभी उठने की ठानी नहीं है।

ये ना पूछो,
कि ये ज़िन्दगी ख़ुशी कब होती है?
क्योंकि ये शिकायत उसकी भी है,
जिसे ये ज़िन्दगी सब कुछ देती है।

बहुत पहले से ही हम उन क़दमों
की आहट को जान लेते हैं,

आपे तो ऐ ज़िन्दगी,
हम दूर से ही पहचान लेते हैं।

ए ज़िन्दगी तू इतना ज़ुल्म ना कर,
कौन सा मैं यहाँ बार बार आने वाला हूँ।

आया ही खयाल था कि आँखें छलक पड़ीं,
आँसू किसी की याद के कितने करीब हैं।

मुझे ज़िन्दगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी में लोग रहते नहीं देते।

सच कहूँ तो मुझे अहसान बुरा लगता है,
जुल्म सहता हुआ इंसान बुरा लगता है,
बहुत मसरुक हो गयी है ये दुनिया,
एक दिन ठौर तो मेहमान बुरा लगता है।

धुप भाग्य हैं लेकिन,
छाया भी कही तो होगी।
जहाँ भी मंजिले होगी,
कही तो ऐसी ज़मीं होगी।

लोग अकड़ कर ऐसे जीते है,
जैसे आबे हयात पीते है।

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अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी -
जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
और हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं।

मेरी नित मोहब्बत मुझे वापस देदी,
जैसे लगा मेरी लाश को मेरे हाथ में थमा दी उसने।

आँखें भी मेरे पलकों से सवाल करती है,
हर वक़्त आपको ही तो याद करता है।
जब तक देख न ले तुम्हारा चहरा,
तब तक हर घडी आपकी इंतज़ार करती है।

तूफ़ान है ज़िंदगी तो साहिल है तेरी दोस्ती,
सफ़र है मेरी ज़िंदगी मंजिल है तेरी दोस्ती।
मौत के बाद बेशक मिलेगी जन्नत,
जिंदगी भर रही अगर कायम तेरी दोस्ती।

फैसला जो कुछ भी हो मंज़ूर होना चाहिए,
इश्क़ हो या जंग भरपूर होना चाहिए।

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मोहब्बत को निभाते है उन्हें मेरा सलाम है।
और जो छोड़ जाते हैं बिच रस्ट में उन्हें मेरा पैगाम,
वादे-ए-वफ़ा करो तो फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए किसी की ज़िन्दगी को बर्बाद ना करो।

सब को प्यारी है ज़िन्दगी लेकिन,
तुम मुझे ज़िन्दगी से भी प्यारे लगते हो।

ज़िन्दगी का अपना रंग है -
दुःख वाली रात सोया नहीं जाता,
और ख़ुशी वाली रात सोने नहीं देती।

यह ज़िन्दगी बस पल दो पल है, 
जिसमें न तो आज और न ही कल है।
जी लो इस ज़िंदगी का हर पल इस तरह,
जैसे बस यही ज़िन्दगी का सबसे हसीं पल है।

किताबों की तरह है वो भी,
अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर खामोश।


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थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ,
ये क्या  कम है मैं पहचान बचा पाया  हूँ।
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकती यादें,
जीने का मैं इतना ही सामन बचा पाया हूँ।

एहसान ये रहा तोहमते लगाने वालों का मुझ पर,
उठती हुई उँगलियों ने मुझे मशहूर कर दिया।

कौन हूँ मैं? ऐ जिंदगी तू ही बता!
थक गया हूँ मैं खुद का पता ढूँढते ढूंढ़ते।

ख़ाली नहीं रहा कभी
आँखों का ये मकान,
सब अश्क़ निकल गये
तो उदासी ठहर गयी।

काश कोई ऐसा होता,
जो अंदर से बाहर जैसा होता।


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कभी पिघलेंगे पत्थर भी मोहब्बत की तपिश पाकर,
बस यही सोच कर हम पत्थर से दिल लगा बैठे।

अब भी इक उम्र पे जीना का न अंदाज़ आया,
ज़िंदगी छोड़ देगे मिरा मैं बाज़ आया।


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